GA Notes: MAJOR SOIL GROUPS AVAILABLE IN INDIA (Part-II)

Dear Students,


General Awareness is an equally important section containing same weightage of 25 questions in SSC CGL, CHSL, MTS exams and has an even more abundant importance in some other exams conducted by SSC.There are questions asked related to Polity. So you should know important facts related to Indian Polity so that you can score well in General Awareness section.

To let you make the most of GA section, we are providing important facts related to Indian Polity. Also, Railway Exam is nearby with bunches of posts for the interested candidates in which General Awareness is a major part to be asked for various posts exams. We have covered important notes focusing on these prestigious exams. We wish you all the best of luck to come over the fear of General Awareness section

MAJOR SOIL GROUPS AVAILABLE IN INDIA

भारत में उपलब्ध प्रमुख मृदा समूह


Arid soils/ शुष्क मृदा:
-Arid soils range from red to brown in colour.
शुष्क मृदा रंग श्रेणी- लाल से भूरे रंग में पायी जाती है.
-They are generally sandy in structure and saline in nature.
आम तौर पर इनकी संरचना रेतीले रूप में और प्रकृति में नमकीन रूप में पाई जाती हैं.
-Nitrogen is insufficient and the phosphate content is normal.
इसमें नाईट्रोजन अपर्याप्त मात्रा में और फॉस्फेट सामान्य मात्रा में पाया जाता है.
-Due to the dry climate, high temperature and accelerated evaporation, they lack moisture and humus.
शुष्क जलवायु, उच्च तापमान और त्वरित वाष्पीकरण के कारण, उनमें नमी और आर्द्रता की कमी होती है.
- Lower horizons of the soil are occupied by ‘kankar’ layers because of the increasing calcium content downwards.
- मिट्टी की सबसे निचली परत में कैल्शियम तत्वों की अधिकता के कारण मृदा की निचली परत 'कंकड़' का जमाव होता है.
-A large part of the arid and semi-arid region in Rajasthan and adjoining areas of Punjab and Haryana lying between the Indus and the Aravalis.
शुष्क और अर्द्ध शुष्क क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान में और पंजाब और हरियाणा के आसपास के इलाकों में सिंधु और अरावली के बीच स्थित है.


Saline soils/ क्षारीय मृदा :
-They are also known as Usara soils.
- वे ऊसर मृदा के रूप में भी जानी जाती है.
-It contains a larger proportion of sodium, potassium and magnesium, and thus, they are infertile, and do not support any vegetative growth.
इसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का एक बड़ा हिस्सा होता है, और इस कारण , वे अनउपजाऊ होते हैं, और किसी भी वनस्पति विकास का समर्थन नहीं करते हैं.
-They lack in nitrogen and calcium.
इनमे नाइट्रोजन और कैल्शियम की कमी है.
-They occur in arid and semi-arid regions, and in waterlogged and swampy areas.
- वे शुष्क और अर्ध शुष्क क्षेत्रों में  और पानी से भरे हुए दलदली क्षेत्रों में पाए जाते हैं.
-Saline soils are more widespread in western Gujarat, deltas of the eastern coast and in Sunderban areas of West Bengal.
- क्षारीय मृदा पश्चिमी गुजरात, पूर्वी तट के डेल्टा और पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाकों में अधिक फैली हुई हैं.


Peaty soils/पीट या जैविक मिट्टी :
-They are found in the areas of heavy rainfall and high humidity, where there is a good growth of vegetation.
वे भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता के क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जहां पेड़ पौधों की वृद्धि अच्छी होती है.
-Large quantity of dead organic matter accumulates in these areas, and this gives a rich humus and organic content to the soil.
- इन क्षेत्रों में मृत कार्बनिक पदार्थ की बड़ी मात्रा जमा होती है, और यह मृदा को एक समृद्ध आर्द्रता और जैविक तत्व प्रदान करती है.
-These soils are normally heavy and black in colour.
-यह मृदा आमतौर पर भारी और काले रंग में पाई जाती है.
-It occurs widely in the northern part of Bihar, southern part of Uttaranchal and the coastal areas of West Bengal, Orissa and Tamil Nadu.
यह बिहार के उत्तरी हिस्से, उत्तरांचल के दक्षिणी हिस्से और पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से पाई जाती है.


Forest soils/ वन मृदा:
- Forest soils are formed in the forest areas where sufficient rainfall is available.
- वन क्षेत्रों में वन मृदा का गठन होता है जहां पर्याप्त वर्षा उपलब्ध होती है.
-They are loamy and silty on valley sides and coarse-grained in the upper slopes.
वे घाटी के किनारों पर चिकनी बलुई मृदा और तलछट/ रेत के रूप में और ऊपरी ढलानों में मोटे दानेदार रूप में पाया जाता हैं.
- In the snow-bound areas of the Himalayas, they experience denudation, and are acidic with low humus content, the soils found in the lower valleys are fertile.
- हिमालय के बर्फ से घिरे क्षेत्रों में, वे अनाच्छादन का अनुभव करते हैं, और कम आर्द्रता तत्वों के साथ अम्लीय होते हैं, निचली घाटियों में पाए जाने वाली मृदा उपजाऊ होती है.
-This type of soil is mostly found in the Himalayan regions, Sikkim, Assam, Arunachal Pradesh and Kashmir and also in the Peninsula, Eastern Ghats and the summits of Sahyadris.
- इस प्रकार की मृदा ज्यादातर हिमालयी क्षेत्रों, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश और कश्मीर में और प्रायद्वीप, पूर्वी घाट और सह्याद्री के शिखर के अग्र भाग में भी पाई जाती है.





                                 

                         

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