GA Notes: Important Events of Indian Freedom Struggle in India (Part-IV)

Dear Students,


General Awareness is an equally important section containing same weightage of 25 questions in SSC CGL, CHSL, MTS exams and has an even more abundant importance in some other exams conducted by SSC.There are questions asked related to Polity. So you should know important facts related to Indian Polity so that you can score well in General Awareness section.

To let you make the most of GA section, we are providing important facts related to Indian Polity. Also, Railway Exam is nearby with bunches of posts for the interested candidates in which General Awareness is a major part to be asked for various posts exams. We have covered important notes focusing on these prestigious exams. We wish you all the best of luck to come over the fear of General Awareness section

Important Events of Indian Freedom Struggle in India

 भारत में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण तथ्य 

Lahore session(1929)/लाहौर सत्र(1929): 
-The 1929 Lahore session under the presidency of Jawaharlal Nehru holds special significance as in this session "Purna Swaraj" (complete independence) was declared as the goal of the INC.
जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में 1929 लाहौर सत्र का एक विशेष महत्व है क्योंकि इस सत्र में "पूर्ण स्वराज" (पूर्ण स्वतंत्रता) को INC के लक्ष्य के रूप में घोषित किया गया था.
-26 January, 1930 was declared as "Purna Swaraj Diwas"(Independence Day).
26 जनवरी, 1930 को "पूर्ण स्वराज दिवस" (स्वतंत्रता दिवस) के रूप में घोषित किया गया था.

The civil disobedience movement/Salt Satyagraha(1930)/ सविनय अवज्ञा आंदोलन / नमक सत्याग्रह(1930):
-Salt March, also called Dandi March or Salt Satyagraha, major nonviolent protest action in India led by Mohandas (Mahatma) Gandhi in March–April 1930.
साल्ट मार्च, जिसे मार्च-अप्रैल 1930 में मोहनदास (महात्मा) गांधी के नेतृत्व में भारत की प्रमुख अहिंसक विरोध कार्रवाई थी,जिसे दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह भी कहा जाता है
-The march was the first act in an even-larger campaign of civil disobedience (satyagraha) Gandhi waged against British rule in India that extended into early 1931 and garnered Gandhi widespread support among the Indian populace and considerable worldwide attention.
यह मार्च भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ गांधी द्वारा किए गए सविनय अवज्ञा (सत्याग्रह) के एक बड़े अभियान में पहला कार्य था, जिसने 1931 की शुरुआत में विस्तार किया और गांधी को भारतीय जनसंख्या के बीच व्यापक समर्थन प्रदान किया और विश्वव्यापी रूप से काफी ध्यान आकर्षित किया.

First Round Table Conference(1930)/ प्रथम गोल मेज सम्मेलन(1930):
-The first Round Table Conference convened from 12 November 1930 to 19 January 1931.
पहला गोल मेज सम्मेलन 12 नवंबर 1930 से 19 जनवरी 1931 तक आयोजित किया गया.
-The Round Table Conference officially inaugurated by His Majesty George V on November 12, 1930 in Royal Gallery House of Lords at London and chaired by the British Prime Minister, Ramsay MacDonald.
गोल मेज सम्मेलन का उद्घाटन आधिकारिक तौर पर 12 नवंबर, 1930 को लंदन में रॉयल गैलरी हाउस ऑफ लॉर्ड्स में उनके महामहिम जॉर्ज वी द्वारा और ब्रिटिश प्रधान मंत्री रामसे मैकडॉनल्ड्स की अध्यक्षता में किया गया.
-Congress did not participate in the first conference, but representatives from all other Indian parties and a number of Princes did.
कांग्रेस ने पहले सम्मेलन में भाग नहीं लिया, लेकिन अन्य सभी भारतीय दलों के प्रतिनिधियों और कई राजकुमार इसमें शामिल हुए

Gandhi–Irwin Pact(1931)/ गांधी-इरविन संधि(1931):
-Gandhi-Irwin Pact, agreement signed on March 5, 1931, between Mohandas K. Gandhi, leader of the Indian nationalist movement, and Lord Irwin (later Lord Halifax), British viceroy (1926–31) of India.
गांधी-इरविन संधि, 5 मार्च, 1931 को भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के नेता मोहनदास के. गांधी और ब्रिटिश वाइसराय (1 926-31) लॉर्ड इरविन (बाद में लॉर्ड हैलिफ़ैक्स) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए,
-It marked the end of a period of civil disobedience (satyagraha) in India against British rule that Gandhi and his followers had initiated with the Salt March (March–April 1930).
इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत में सविनय अवज्ञा (सत्याग्रह) की अवधि का अंत किया, जिसकी गांधी और उनके अनुयायियों ने साल्ट मार्च (मार्च-अप्रैल 1930) के साथ शुरुआत की थी.

Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev Martyred(1931)/ भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव शहीद (1931):
-On March 23, 1931, Bhagat Singh along with his associates Sukhdev Thapar and Shivaram Rajguru were hanged to death for the assassination of 21-year-old British police officer John Saunders.
23 मार्च, 1931 को, भगत सिंह को उनके सहयोगियों सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु के साथ 21 वर्षीय ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉंडर्स की हत्या के लिए मौत की सजा दी गयी.
-The day they were executed is celebrated as Martyrs' Day throughout the country.
जिस दिन उन्हें शहीदगी दी गयी थी, उस दिन को पूरे देश में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है.

Second Round Table Conference(1931)/ दूसरा गोल मेज सम्मेलन(1931):
-The second session (September–December 1931) was attended by Mahatma Gandhi as the Congress representative.
दूसरे सत्र (सितंबर-दिसंबर 1 9 31) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था.
-It failed to reach agreement, either constitutionally or on communal representation.
यह या तो संवैधानिक रूप से या सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व स्तर पर समझौते तक पहुंचने में असफल रहा.

Poona Pact(1932)/ पूना संधि(1932):
-The Poona Pact refers to an agreement between B. R. Ambedkar and M. K. Gandhi on the reservation of electoral seats for the depressed classes in the legislature of British India government.
पूना संधि ब्रिटिश भारत सरकार के विधायिका में दलित वर्गों के लिए चुनावी सीटों के आरक्षण पर बी आर अम्बेडकर और एम के गांधी के बीच एक समझौते को संदर्भित करती है.
-The agreement was signed by Pt Madan Mohan Malviya and Dr. B. R. Ambedkar and some Dalit leaders at Yerwada Central Jail in Pune, to break Mahathma Gandhi's fast unto death.
महात्मा गांधी के उपवास को तोड़ने के लिए पुणे में येरवाड़ा सेंट्रल जेल में पीटी मदन मोहन मालवीय और डॉ बी आर अम्बेडकर और कुछ दलित नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

Communal Award(1932)/सांप्रदायिक पुरस्कार(1932):
-On August 16, 1932, the British Prime Minister McDonald announced the Communal Award. Thus it is also known as McDonald Award.
16 अगस्त, 1932 को ब्रिटिश प्रधान मंत्री मैकडॉनल्ड्स ने सांप्रदायिक पुरस्कार की घोषणा की. इस प्रकार इसे मैकडॉनल्ड्स पुरस्कार भी कहा जाता है.
-The Communal Award was basically a proposal on minority representation.
सांप्रदायिक पुरस्कार मूल रूप से अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व पर एक प्रस्ताव था.

Third Round Table Conference(1932)/ तीसरागोल मेज सम्मेलन:
-Third Round Table Conference was held in London on November 17, 1932. This was just a nominal conference, Congress refused to attend it.
तीसरा गोल मेज सम्मेलन 17 नवंबर, 1932 को लंदन में आयोजित किया गया था. यह सिर्फ एक मामूली सम्मेलन था, कांग्रेस ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.
-The recommendations of this conference were published in a White Paper in 1933 and later discussed in the British Parliament. The recommendations were analysed and the Government of India Act of 1935 was passed on its basis.
इस सम्मेलन की सिफारिशें 1933 में एक श्वेत पत्र में प्रकाशित हुईं और बाद में ब्रिटिश संसद में इस पर चर्चा की गई. सिफारिशों का विश्लेषण किया गया और 1935 का भारत सरकार अधिनियम इसके आधार पर पारित किया गया था.

Government of India Act 1935/ भारत सरकार अधिनियम 1935:
-The Government of India Act, 1935 was passed by British Parliament in August 1935. With 321 sections and 10 schedules, this was the longest act passed by British Parliament so far and was later split into two parts viz. Government of India Act, 1935 and Government of Burma Act, 1935.
भारत सरकार अधिनियम, 1935 अगस्त 1935 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था 321 अनुच्छेद और 10 अनुसूची के साथ, ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया अब तक का सबसे लंबा अधिनियम था और बाद में इसे दो भागों में विभाजित किया गया था, अर्थार्त भारत सरकार अधिनियम, 1935 और बर्मा सरकार अधिनियम, 1935.
- Salient Features of the Government of India Act 1935 were as follows:
- भारत सरकार अधिनियम 1935 की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार थीं:
a)Abolition of provincial dyarchy and introduction of dyarchy at centre.
प्रांतीय द्विशासन का उन्मूलन और केंद्र में द्विशासन का परिचय.
b)Abolition of Indian Council and introduction of an advisory body in its place.
भारतीय परिषद का उन्मूलन और इसके स्थान पर एक सलाहकार निकाय की शुरूआत
c)Provision for an All India Federation with British India territories and princely states.
ब्रिटिश भारत के क्षेत्रों और रियासतों के साथ अखिल भारतीय संघ के लिए प्रावधान
d)Elaborate safeguards and protective instruments for minorities.
अल्पसंख्यकों के लिए विस्तृत सुरक्षा और सुरक्षात्मक उपकरण
e)Supremacy of British Parliament.
ब्रिटिश संसद की सर्वोच्चता
f)Increase in size of legislatures, extension of franchise, division of subjects into three lists and retention of communal electorate.
विधायिकाओं के आकार में वृद्धि, फ्रेंचाइजी का विस्तार, विषयों की विभाजन तीन सूचियों में और सांप्रदायिक मतदाताओं का प्रतिधारण
g)Separation of Burma from India.
भारत से बर्मा का पृथक्करण



                                 

                         

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