GA Notes: Important Events of Indian Freedom Struggle in India (Part-III)

Dear Students,


General Awareness is an equally important section containing same weightage of 25 questions in SSC CGL, CHSL, MTS exams and has an even more abundant importance in some other exams conducted by SSC.There are questions asked related to Polity. So you should know important facts related to Indian Polity so that you can score well in General Awareness section.

To let you make the most of GA section, we are providing important facts related to Indian Polity. Also, Railway Exam is nearby with bunches of posts for the interested candidates in which General Awareness is a major part to be asked for various posts exams. We have covered important notes focusing on these prestigious exams. We wish you all the best of luck to come over the fear of General Awareness section

Important Events of Indian Freedom Struggle in India

 भारत में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण तथ्य 

Montague-Chelmsford Reforms introduced(1919)/मोंटेग-चेम्सफोर्ड सुधार प्रस्तुत किए गए (1919):
- The Montagu–Chelmsford Reforms or more briefly known as Mont-Ford Reforms were reforms introduced by the British colonial government in India to introduce self-governing institutions gradually to India. The reforms take their name from Edwin Samuel Montagu, the Secretary of State for India during the latter parts of World War I and Lord Chelmsford, Viceroy of India between 1916 and 1921
मोंटग-चेम्सफोर्ड सुधार या अधिक संक्षेप में मोंट-फोर्ड सुधार के रूप में ज्ञात, भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार द्वारा भारत में धीरे-धीरे स्वयं-शासित संस्थानों को पेश करने के लिए सुधार किए गए थे. सुधारों को एडविन सैमुअल मोंटगुए, प्रथम विश्व युद्ध के बाद के हिस्सों के दौरान भारत के विदेश सचिव और और लॉर्ड चेम्सफोर्ड, 1916 और 1921 के बीच भारत के वाइसराय के अनुसार नामित किया गया.
- The important features of this act were as follows /इस अधिनियम की महत्वपूर्ण विशेषताएं इस प्रकार थीं:
a) The Central Legislative Council was now to consist of two houses- The Imperial Legislative and the Council of States
केन्द्रीय विधान परिषद अब दो सदन - शाही विधान और राज्य परिषद शामिल थे.
b) The provinces were to follow the Dual Government System or Dyarchy
प्रांतों को दोहरी सरकारी प्रणाली या डायरैची का पालन करना था.
c) The secretary of state and the governor-general could interfere in respect of “reserved” subjects while in respect of the “transferred” subjects; the scope for their interference was restricted.
राज्य और राज्यपाल-जनरल के सचिव "आरक्षित" विषयों के संबंध में हस्तक्षेप कर सकते हैं जबकि "स्थानांतरित" विषयों के संबंध में; उनके हस्तक्षेप के लिए दायरा प्रतिबंधित था.


Jallianwala Bagh massacre at Amritsar(1919)/अमृतसर में जालियावाला बाग हत्याकांड (1919):
- On April 13, 1919, which happened to be 'Baisakhi', one of Punjab's largest religious festivals, fifty British Indian Army soldiers, commanded by Brigadier-General Reginald Dyer, began shooting at an unarmed gathering of men, women, and children without warning
13 अप्रैल, 1919 को, पंजाब के सबसे बड़े धार्मिक त्यौहारों में से एक ‘बैसाखी’ के दिन, ब्रिगेडियर-जनरल रेजिनाल्ड डायर के आदेश पर पचास ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों ने, बिना चेतावनी के पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की एक निर्बाध सभा में गोलाबारी शुरू कर दी.

Non-cooperation movement (1920)/असहयोग आंदोलन (1920):
- It was led by Mohandas Karamchand Gandhi after the Jallianwala Bagh Massacre
जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद मोहनदास करमचंद गांधी द्वारा इसका नेतृत्व किया गया.
- It aimed to resist British rule in India through nonviolence means,"Ahimsa"
इसका उद्देश्य अहिंसा के माध्यम से भारत में ब्रिटिश शासन का विरोध करना था.
- The ideas of Ahimsa and nonviolence, and Gandhi's ability to rally hundreds thousands of common citizens towards the cause of Indian independence, were first seen on a large scale in this movement through the summer of 1920
अहिंसा और अहिंसा के विचार, और भारतीय स्वतंत्रता के लिए सैकड़ों हजारों आम नागरिकों को साथ लाने की गांधी की क्षमता, 1920 की गर्मियों में पहली बार इस आंदोलन के माध्यम से बड़े पैमाने पर देखी गयी थी.

Khilafat Movement launched(1920)/खिलाफत आंदोलन की शुरूआत किया (1920):
- The Khilafat movement (1919-1924) was an agitation by Indian Muslims allied with Indian nationalism in the years following World War I
खिलाफत आंदोलन (1919-1924) प्रथम विश्व युद्ध के बाद के वर्षों में भारतीय राष्ट्रवाद के साथ संबंधित भारतीय मुसलमानों द्वारा किया गया.
- Its purpose was to pressure the British government to preserve the authority of the Ottoman Sultan as Caliph of Islam following the breakup of the Ottoman Empire at the end of the war
इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार को युद्ध के अंत में तुर्क साम्राज्य के टूटने के बाद इस्लाम के खलीफ के रूप में तुर्क सुल्तान के अधिकार को संरक्षित करने के लिए दबाव डालना था.

Moplah rebellion in Malabar(1921)/मालाबार में मोप्ला विद्रोह (1921):
- The Moplah Rebellion or the Malabar Rebellion was an extended version of the Khilafat Movement in Kerala in 1921
मोप्पला विद्रोह या मालाबार विद्रोह 1921 में केरल में खिलाफत आंदोलन का विस्तारित संस्करण था.
- The Government had declared the Congress and Khilafat meetings illegal. So, a reaction in Kerala began against the crackdown of the British in Eranad and Valluvanad taluks of Malabar
सरकार ने कांग्रेस और खिलाफ़त की बैठकों को अवैध घोषित किया था. इसलिए, केरल में एक प्रतिक्रिया ने इरानाद और मालबार के वल्लुवनद तालुक में अंग्रेजों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की.


Chauri-Chaura incidence(1922)/चौरी-चौरा घटनाएं (1922):
- The Chauri Chaura incident occurred at Chauri Chaura in the Gorakhpur district of the United Province, (modern Uttar Pradesh) in British India on 5 February 1922, when a large group of protesters, participating in the Non-cooperation movement, clashed with police, who opened fire
चौरी चौरा घटना 5 फरवरी 1 9 22 को ब्रिटिश भारत में संयुक्त प्रांत के गोरखपुर जिले (आधुनिक उत्तर प्रदेश) में चौरी चौरा में हुई थी, जब असहयोग आंदोलन में भाग ले रहा प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह, पुलिस से जा टकराया, और गोलाबारी शुरू हो  गयी.
- The incident led to the deaths of three civilians and 22 or 23 policemen. Mahatma Gandhi, who was strictly against violence, halted the Non-cooperation Movement on the national level on 12 February 1922, as a direct result of this incident
इस घटना के कारण तीन नागरिकों और 22 या 23 पुलिसकर्मी की मौत हुई. महात्मा गांधी, जो हिंसा के सख्त खिलाफ थे, उन्होंने इस घटना के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में 12 फरवरी 1922 को राष्ट्रीय स्तर पर असहयोग आंदोलन को रोक दिया.


Swaraj party formed(1923)/स्वराज पार्टी का गठन (1923):
- The Swaraj Party or the Congress-Khilafat Swarajya Party was formed on 1 January 1923 by C R Das and Motilal Nehru formed in India in January 1923 after the Gaya annual conference in December 1922 of the National Congress
राष्ट्रीय कांग्रेस के दिसंबर 1922 में गया वार्षिक सम्मेलन के बाद 1 जनवरी 1923 को भारत में सी आर दास और मोतीलाल नेहरू द्वारा 1 जनवरी 1923 को स्वराज पार्टी या कांग्रेस-खिलाफ़त स्वराज्य पार्टी का गठन किया गया था.
- C R Das was the President and the Secretary was Motilal Nehru
सी आर दास राष्ट्रपति थे और मोतीलाल नेहरू सचिव थे.
- Prominent leaders of the Swaraj Party included N C Kelkar, Huseyn Shaheed Suhrawardy and Subhas Chandra Bose
स्वराज पार्टी के प्रमुख नेताओं में एन सी केल्कर, हुसेन शहीद सुहरावर्दी और सुभाष चंद्र बोस शामिल थे.


Appointed of Simon Commission (1927)/साइमन कमीशन की स्थापना (1927):
- The Indian Statutory Commission, commonly referred to as the Simon Commission was a group of seven British Members of Parliament of United Kingdom under the chairmanship of Sir John Allsebrook Simon assisted by Clement Attlee
भारतीय वैधानिक आयोग, जिसे आमतौर पर साइमन कमीशन के रूप में जाना जाता है, यूनाइटेड किंगडम की संसद के सात ब्रिटिश सदस्यों का समूह था जिसे सर जॉन ऑलसेब्रुक साइमन की अध्यक्षता में क्लेमेंट एटली द्वारा सहायता प्रदान थी.
- The commission arrived in British India in 1928
आयोग 1928 में ब्रिटिश भारत आया था.
- The commission was boycotted by the Indian National Congress and most other Indian political parties because Indians were excluded from the commission
 कमीशन को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अन्य भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा बहिष्कृत किया गया क्योंकि भारतीयों को कमीशन से बाहर रखा गया था.

Bardoli Satyagraha(1928)/बारडोली सत्याग्रह (1928):
- The Bardoli Satyagraha, 1928 was a movement in the independence struggle led by Sardar Vallabhai Patel for the farmers of Bardoli against the unjust raising of taxes
बारडोली सत्याग्रह, 1928 सरदार वल्लभाई पटेल की अगुवाई में स्वतंत्रता संग्राम में एक आंदोलन था जो बारडोली के किसानों के लिए करों के अन्यायपूर्ण बढ़त के खिलाफ था.

Central Assembly Bombed by Bhagat Singh and Batukeshwar Dutt(1929)/भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा बमबारी केंद्रीय असेंबली (1929):
- In order to court arrest, Shaheed Bhagat Singh and Batukeshwar Dutt threw political handouts and smoke bombs at the Delhi Central Legislative Assembly
अदालत की गिरफ्तारी के बाद, शहीद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली केंद्रीय विधान सभा में राजनीतिक हैंडआउट और स्मोक बम फेंके.
- The aim behind the bombing was not to cause harm but protest against the passing of two repressive bills, the Public Safety Bill and the Trade Dispute Bill
बमबारी के पीछे का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था, लेकिन दो दमनकारी बिलों, लोक सुरक्षा विधेयक और व्यापार विवाद विधेयक पारित करने के खिलाफ विरोध था.


      

                         

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